धैर्य
नाले झरने ही
मंद बारिश में
जाते हैं बौरा,
बड़ी नदी ही
इस बारिश में
रहती निर्जला|
इस नदी को कम मत आँको इसमें धैर्य है बड़ा,
इसकी तेज धरा में कोई नहीं अड़ा,
उफान पर ये आ जाये तो फिर कहना निर्जला या जलजला|
छोटे गंधक, कृश ज्वालामुखी ही फटते हर पल,
पर इनमे इतना दम नहीं की बदल सके कभी कल|
खामोश पहाड़ों से भी आवाज़ आती है,
सोते हुए भी वो गाती हैं ,
इन्हें कभी समझना ना कमजोर ये एक बार ही फट के ये युग बदल जाती हैं |
इस नदी को कम मत आँको इसमें धैर्य है बड़ा,
इसकी तेज धरा में कोई नहीं अड़ा,
उफान पर ये आ जाये तो फिर कहना निर्जला या जलजला|
छोटे गंधक, कृश ज्वालामुखी ही फटते हर पल,
पर इनमे इतना दम नहीं की बदल सके कभी कल|
खामोश पहाड़ों से भी आवाज़ आती है,
सोते हुए भी वो गाती हैं ,
इन्हें कभी समझना ना कमजोर ये एक बार ही फट के ये युग बदल जाती हैं |
SHIIR
© Shishir Kumar
Chandra

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