Tuesday, 29 May 2012

Patience


धैर्य
नाले झरने ही मंद बारिश में जाते हैं बौरा,
बड़ी नदी ही इस बारिश में रहती निर्जला|

इस नदी को कम मत आँको इसमें धैर्य है बड़ा,
इसकी तेज धरा में कोई नहीं अड़ा,
उफान पर ये जाये तो फिर कहना निर्जला या जलजला|

छोटे गंधक, कृश ज्वालामुखी ही फटते हर पल,
पर इनमे इतना दम नहीं की बदल सके कभी कल|

खामोश पहाड़ों  से भी आवाज़ आती है,
सोते हुए भी वो गाती हैं ,
इन्हें कभी समझना ना कमजोर ये एक बार ही फट के ये युग बदल जाती हैं |


SHIIR
© Shishir Kumar Chandra

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